Friday, 1 September 2023

मैं चिराग हूं हर घर की
फिर भी मेरी दीप्ती का शमन किया जाता हैं
मैं बनकर माँ पालन करती, तो बहन बन लाती खुशहाली  हूँ ,
तो कभी दादी, नानी बन कहानियाँ सुनाया करती हूँ ,
छोड़ सुख अपने सारे, अपने घर का त्याग करती हूँ ।

मेरे रूप अनेक, समय के साथ ढलती हूँ मैं,
नवरात्रो में देवी के रूप में पूजी जाती,
तो कही राखी और भैया दूज की रौनक हूँ मैं।
बिन मेरे ये ये जग अधूरा हैं , फिर भी मेरी दीप्ती का शमन ...............

आज हर क्षेत्र में अव्वल हूँ मैं
शिक्षा , संगीत  या हो फिर क्रीड़ा स्थल,
चाहे ऑफिस हो या घर
चाँद पर भी मैं गयी हूँ , फिर भी मेरी दीप्ती का शमन ...............

फिर भी रह गयी क्या कमी मुझमें ?
जो मैं इतने ताने सुनति हूँ

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