Friday, 1 September 2023

मैं चिराग हूं हर घर की
फिर भी मेरी दीप्ती का शमन किया जाता हैं
मैं बनकर माँ पालन करती, तो बहन बन लाती खुशहाली  हूँ ,
तो कभी दादी, नानी बन कहानियाँ सुनाया करती हूँ ,
छोड़ सुख अपने सारे, अपने घर का त्याग करती हूँ ।

मेरे रूप अनेक, समय के साथ ढलती हूँ मैं,
नवरात्रो में देवी के रूप में पूजी जाती,
तो कही राखी और भैया दूज की रौनक हूँ मैं।
बिन मेरे ये ये जग अधूरा हैं , फिर भी मेरी दीप्ती का शमन ...............

आज हर क्षेत्र में अव्वल हूँ मैं
शिक्षा , संगीत  या हो फिर क्रीड़ा स्थल,
चाहे ऑफिस हो या घर
चाँद पर भी मैं गयी हूँ , फिर भी मेरी दीप्ती का शमन ...............

फिर भी रह गयी क्या कमी मुझमें ?
जो मैं इतने ताने सुनति हूँ

Monday, 8 February 2016

                                 मेरा प्यारा उत्तराखंड 


मेरी सरकार

मैंने सोचा कुछ लिख डालू-
मैं अपने शहर का हाल,
दूर- दूर तक सड़क नही हैं,
Education का बुरा हाल.
नहीं Strategy कोई उद्यमता की,
भाग रहे है युवा जवान,
ताले लग गए गाऊँ घरो मे
बंजर पड़ गए खेत खलियान ।

खुशकिस्मत हम इस कुदरत के-
जो नदिया जंगल मेरे गाऊँ,
फिर भी कहते फिरते ये नेता
ये सब कुछ देन हमारी हैं ,
चार बरस वो चुप सोये रहते
Election मे वादो की भरमारी हैं।

फिर से उठा बज बिगुल Election का
हाथ जोड़ खड़े नेता हैं,
देदो हमको वोट ये अपना
सच होगा तेरे गाऊँ सपना ।
बिजली होगी, सड़क भी होगी
गाऊँ- गाऊँ में विकाश और उन्नति होगी ।

जनता भी अब झूम उठी हैं
हाथ में उनके पैंसा और मदिरा हैं
देख सुख अपना वो दो दिन का
बेच आये अपना अधिकार
देखो भाई फिर से बन आयी मेरी सरकार ।