मेरा प्यारा उत्तराखंड
मेरी सरकार
मैंने सोचा कुछ लिख डालू-
मैं अपने शहर का हाल,
दूर- दूर तक सड़क नही हैं,
Education का बुरा हाल.
नहीं Strategy कोई उद्यमता की,
भाग रहे है युवा जवान,
ताले लग गए गाऊँ घरो मे
बंजर पड़ गए खेत खलियान ।
खुशकिस्मत हम इस कुदरत के-
जो नदिया जंगल मेरे गाऊँ,
फिर भी कहते फिरते ये नेता
ये सब कुछ देन हमारी हैं ,
चार बरस वो चुप सोये रहते
Election मे वादो की भरमारी हैं।
फिर से उठा बज बिगुल Election का
हाथ जोड़ खड़े नेता हैं,
देदो हमको वोट ये अपना
सच होगा तेरे गाऊँ सपना ।
बिजली होगी, सड़क भी होगी
गाऊँ- गाऊँ में विकाश और उन्नति होगी ।
जनता भी अब झूम उठी हैं
हाथ में उनके पैंसा और मदिरा हैं
देख सुख अपना वो दो दिन का
बेच आये अपना अधिकार
देखो भाई फिर से बन आयी मेरी सरकार ।
Nice poem about from Uttrakhand political
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